तुलना करने से पहले विकल्प छाँट दीजिए
कम वक़्त में हर विकल्प को बारीकी से तौलने की कोशिश मत कीजिए। पहले उन्हें हटाइए जिनके बारे में आप पहले से जानते हैं कि वे ग़लत हैं। साफ़ तौर पर ग़लत विकल्प हटते ही, वक़्त की तंगी वाले ज़्यादातर फ़ैसलों में दो-तीन ही असली दावेदार बचते हैं।
आपका पहला एहसास एक संकेत है, कोई शॉर्टकट नहीं
वक़्त के दबाव में आपकी पहली ईमानदार सहज प्रतिक्रिया अक्सर आपकी धीमी सोच का ही निचोड़ होती है, कोई लापरवाह अंदाज़ा नहीं। ग़ौर कीजिए कि ज़्यादा सोचना शुरू करने से पहले आप किस विकल्प की तरफ़ झुके थे, या किससे पीछे हटे थे। उस प्रतिक्रिया को आमतौर पर उससे ज़्यादा वज़न देना चाहिए जितना अभी महसूस हो रहा है।
दिशा तय कीजिए, हर छोटी बात नहीं
आगे बढ़ने के लिए हर ब्योरा तय होना ज़रूरी नहीं, बस मुख्य दिशा तय होनी चाहिए। छोटी बातें अक्सर दिशा चुन लेने के बाद भी बदली जा सकती हैं। सब कुछ पक्का होने के इंतज़ार में कुछ भी तय न करना ही आमतौर पर वक़्त निकाल देता है।
जल्दी लिया गया फ़ैसला कमतर नहीं होता
आपके पास जो ईमानदार जानकारी थी, उसके साथ जल्दी लिया गया फ़ैसला अपने आप में धीरे लिए गए फ़ैसले से बुरा नहीं होता। बस वह अलग हालात में लिया गया होता है। बाद में उसे इस पैमाने पर परखिए कि उस वक़्त की जानकारी के हिसाब से वह वाजिब था या नहीं, इस पर नहीं कि आपके पास कितना वक़्त था।
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